№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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The Death of Jatayu

Karuna

लाज न आवत दास कहावत

Laaj Na Aavat Das Kahavat

Tulsidas
1 min read 1 versesआत्मग्लानिself-reproachपाप

1 verses · ~1 min

लाज न आवत दास कहावत। सो आचरन-बिसारि सोच तजि जो हरि तुम कहँ भावत॥१॥ सकल संग तजि भजत जाहि मुनि, जप तप जाग बनावत। मो सम मंद महाखल पाँवर, कौन जतन तेहि पावत॥२॥ हरि निरमल, मल ग्रसित ह्रदय, असंजस मोहि जनावत। जेहि सर काक बंक बक-सूकर, क्यों मराल तहँ आवत॥३॥ जाकी सरन जाइ कोबिद, दारुन त्रयताप बुझावत। तहूँ गये मद मोह लोभ अति, सरगहुँ मिटत न सावत॥४॥ भव-सरिता कहँ नाउ संत यह कहि औरनि समुझावत। हौं तिनसों हरि परम बैर करि तुमसों भलो मनावत॥५॥ नाहिन और ठौर मो कहॅं, तातें हठि नातो लावत। राखु सरन उदार-चूड़ामनि, तुलसिदास गुन गावत॥६॥

इति

Tulsidas

The Poet

तुलसीदास

Tulsidas

The Death of Jatayu

Paired Painting

The Death of Jatayu

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Laaj Na Aavat Das Kahavat carries.