
मैं भी शायद बुरा नहीं होता
Main Bhi Shayad Bura Nahi Hota
Bashir Badr
7 verses · ~9 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Karuna
Raste Mein Kahin Chahne Wale Bhi Padenge
Shalabh Shriram Singh7 verses · ~1 min
रस्ते में कहीं चाहने वाले भी पड़ेंगे दिल है तो कभी जस के लाले भी पड़ेंगे
गैरों से गले मिलके लिपटने की चाह में अपनों से कभी आप के पाले भी पड़ेंगे
जिस नाम के हमनाम हों उस नाम के लिए हिस्से में कभी देश निकले भी पड़ेंगे
कहते हो सफ़रे जीस्त पे निकले हो, देखना काँटों के लिए पाँवों में छाले भी पड़ेंगे
जिस घर से निकलने की 'शलभ ' सोच रहे हो लौटे किसी दिन और तो ताले भी पड़ेंगे
रचनाकाल: 14 मई 1984, जगदलपुर
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
The Birth of Shakuntala
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Raste Mein Kahin Chahne Wale Bhi Padenge carries.