
निर्जनों में
Nirjanon Mein
Pratibha Saxena
5 verses · ~16 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Ajanabi Desh Hai Yeh
Sarveshwar Dayal Saxena7 verses · ~1 min
अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है
जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई, नींद में जैसे कोई लौट-लौट जाता है
होश अपने का भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है
शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है
देखिए तो वही बहकी हुई हवाएँ हैं, फिर वही रात है, फिर-फिर वही सन्नाटा है
हम कहीं और चले जाते हैं अपनी धुन में रास्ता है कि कहीं और चला जाता है
दिल को नासेह की ज़रूरत है न चारागर की आप ही रोता है औ आप ही समझाता है ।
इति

Paired Painting
Dark and difficult was the road
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ajanabi Desh Hai Yeh carries.