№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Urvashi

Karuna

सब को दिल के दाग़ दिखाए एक तुझी को दिखा न सके

Sab Ko Dil Ke Daag Dikhaye Ek Tuzhi Ko Dikha Na Sake

Ibn-e-Insha
1 min read 5 versesदिलheartदामन

5 verses · ~1 min

सब को दिल के दाग़ दिखाए एक तुझी को दिखा न सके तेरा दामन दूर नहीं था हाथ हमीं फैला न सके

तू ऐ दोस्त कहाँ ले आया चेहरा ये ख़ुर्शीद मिसाल सीने में आबाद करेंगे आँखों में तो समा न सके

ना तुझ से कुछ हम को निस्बत ना तुझ को कुछ हम से काम हम को ये मालूम था लेकिन दिल को ये समझा न सके

अब तुझ से किस मुँह से कह दें सात समुंदर पार न जा बीच की इक दीवार भी हम तो फाँद न पाए ढा न सके

मन पापी की उजड़ी खेती सूखी की सूखी ही रही उमडे बादल गरजे बादल बूँदें दो बरसा न सके

इति

Ibn-e-Insha

The Poet

इब्ने इंशा

Ibn-e-Insha

Urvashi

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Urvashi

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sab Ko Dil Ke Daag Dikhaye Ek Tuzhi Ko Dikha Na Sake carries.