№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Mandodari Repressing the Wrath of Ravana

Veera

हर ज़र्रा यहाँ शोला दहन है कि नहीं? है

Har Zarra Yahan Shola Dahan Hai Ki Nahi? Hai

Shalabh Shriram Singh
2 min read 7 versesशोलावक़्तदुनिया

7 verses · ~2 min

हर ज़र्रा यहाँ शोला दहन है कि नहीं? है अब वक़्त के माथे पे शिकन है कि नहीं? है

कहते थे कि दुनिया नहीं बदलेगी कभी भी बदला हुआ दुनिया का चलन है कि नहीं? है

बिकने से भी बदतर है रेहन होना किसी का दिल हो कि दिमाग रेहन है कि नहीं? है

सर पर है कफ़न और जवाँ आरजू भी है पर दार है की नहीं रसन है कि नहीं? है

रावन की सल्तनत तो शलभ अब भी है कायम पर राम के हिस्से में भी वन है कि नहीं? है

रचनाकाल: 25 जून 1984, जगदलपुर

शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।

इति

Shalabh Shriram Singh

The Poet

शलभ श्रीराम सिंह

Shalabh Shriram Singh

Mandodari Repressing the Wrath of Ravana

Paired Painting

Mandodari Repressing the Wrath of Ravana

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Har Zarra Yahan Shola Dahan Hai Ki Nahi? Hai carries.