
खिलौनेवाला
Khilonevala
Subhadra Kumari Chauhan
14 verses · ~32 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Veera
Har Zarra Yahan Shola Dahan Hai Ki Nahi? Hai
Shalabh Shriram Singh7 verses · ~2 min
हर ज़र्रा यहाँ शोला दहन है कि नहीं? है अब वक़्त के माथे पे शिकन है कि नहीं? है
कहते थे कि दुनिया नहीं बदलेगी कभी भी बदला हुआ दुनिया का चलन है कि नहीं? है
बिकने से भी बदतर है रेहन होना किसी का दिल हो कि दिमाग रेहन है कि नहीं? है
सर पर है कफ़न और जवाँ आरजू भी है पर दार है की नहीं रसन है कि नहीं? है
रावन की सल्तनत तो शलभ अब भी है कायम पर राम के हिस्से में भी वन है कि नहीं? है
रचनाकाल: 25 जून 1984, जगदलपुर
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
Mandodari Repressing the Wrath of Ravana
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