
आ: धरती कितना देती है
Aa: Dharti Kitna Deti Hai
Sumitranandan Pant
10 verses · ~50 lines · 3 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Mochi Ki Aankhon Mein
Shalabh Shriram Singh4 verses · ~2 min
आँखें उठी हुई हैं आदम कद आस्था कि एक स्त्री खड़ी है सामने कठवत के पानी को गंगा में बदलने की शक्ति से भरपूर एक चंगा मन सहेजे अपने भीतर मोची की आँखों में सिर्फ़ राँपी नहीं हो सकती है कोई स्त्री
आँखें उठी हुई हैं इतिहास का एक पन्ना खड़ा है सामने पूरे परिदृश्य में सम्मान की तरह व्यवधान से थोड़ा ऊपर, नीचे थोड़ा आग्रह और निवेदन से मोची की आँखों में सिर्फ़ सूजा नहीं हो सकता है कोई पुरुष
आँखें उठी हुई हैं सामने बच्चे की शक्ल में खड़ा है पुष्पित अनुराग पंखुड़ी-पंखुड़ी खुलकर खिलने का सपना परोसता हास की सुगंध से सुवासित करता मन को मोची की आँखों में सिर्फ़ सूता नहीं हो सकता है कोई भी बच्चा
शलभ श्रीराम सिंह की यह रचना उनकी निजी डायरी से कविता कोश को चित्रकार और हिन्दी के कवि कुँअर रवीन्द्र के सहयोग से प्राप्त हुई। शलभ जी मृत्यु से पहले अपनी डायरियाँ और रचनाएँ उन्हें सौंप गए थे।
इति

Paired Painting
The Milkmaid
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mochi Ki Aankhon Mein carries.