
गगन में बदरा
Gagan Me Badra
Avaneesh Singh Chauhan
7 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के । आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के ।
पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाए बाँकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरके ।
बूढ़े़ पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की ‘बरस बाद सुधि लीन्ही’ बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की हरसाया ताल लाया पानी परात भर के ।
क्षितिज अटारी गदराई दामिनि दमकी ‘क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की’ बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के ।
इति

Paired Painting
Scene Of Hindu Marriage Ceremony
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Megh Aae carries.