№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
The Reaper

Veera

फसल

Fasal

Sarveshwar Dayal Saxena
1 min read 3 versesकलमpenक्रांति

3 verses · ~1 min

हल की तरह कुदाल की तरह या खुरपी की तरह पकड़ भी लूँ कलम तो फिर भी फसल काटने मिलेगी नहीं हम को ।

हम तो ज़मीन ही तैयार कर पायेंगे क्रांतिबीज बोने कुछ बिरले ही आयेंगे हरा-भरा वही करेंगें मेरे श्रम को सिलसिला मिलेगा आगे मेरे क्रम को ।

कल जो भी फसल उगेगी, लहलहाएगी मेरे ना रहने पर भी हवा से इठलाएगी तब मेरी आत्मा सुनहरी धूप बन बरसेगी जिन्होने बीज बोए थे उन्हीं के चरण परसेगी काटेंगे उसे जो फिर वो ही उसे बोएंगे हम तो कहीं धरती के नीचे दबे सोयेंगे ।

इति

Sarveshwar Dayal Saxena

The Poet

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

Sarveshwar Dayal Saxena

The Reaper

Paired Painting

The Reaper

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Fasal carries.