№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Decking the Bride

Shanta

मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन

Mere Bhaiya Mere Chanda Mere Anmol Ratan

Sahir Ludhianvi
2 min read 5 versesभाई-बहनsibling loveममता

5 verses · ~2 min

मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लूँ मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लूँ

तेरी साँसों की कसम खाके, हवा चलती है तेरे चहरे की खलक पाके, बहार आती है एक पल भी मेरी नज़रों से तू जो ओझल हो हर तरफ़ मेरी नज़र तुझको पुकार आती है

मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लूँ मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लूँ

तेरे चहरे की महकती हुई लड़ियों के लिए अनगिनत फूल उम्मीदों के चुने हैं मैंने वो भी दिन आएं कि उन ख़्वाबों के ताबीर मिलें तेरे ख़ातिर जो हसीं ख़्वाब बुने हैं मैंने

मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लूँ मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लूँ

इति

Sahir Ludhianvi

The Poet

साहिर लुधियानवी

Sahir Ludhianvi

Decking the Bride

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Decking the Bride

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mere Bhaiya Mere Chanda Mere Anmol Ratan carries.