№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Shanta

अकेले पेड़ों का तूफ़ान

Akele Pedon Ka Toofan

Vijaydev Narayan Sahi
1 min read 1 versesतूफ़ानstormपेड़

1 verses · ~1 min

फिर तेजी से तूफ़ान का झोंका आया और सड़क के किनारे खड़े सिर्फ एक पेड़ को हिला गया शेष पेड़ गुमसुम देखते रहे उनमें कोई हरकत नहीं हुई। जब एक पेड़ झूम-झूम कर निढाल हो गया पत्तियाँ गिर गयीं टहनियाँ टूट गयीं तना ऐंचा हो गया तब हवा आगे बढ़ी उसने सड़क के किनारे दूसरे पेड़ को हिलाया शेष पेड़ गुमसुम देखते रहे उनमें कोई हरकत नहीं हुई। इस नगर में लोग या तो पागलों की तरह उत्तेजित होते हैं या दुबक कर गुमसुम हो जाते हैं। जब वे गुमसुम होते हैं तब अकेले होते हैं लेकिन जब उत्तेजित होते हैं तब और भी अकेले हो जाते हैं।

इति

Vijaydev Narayan Sahi

The Poet

विजयदेव नारायण साही

Vijaydev Narayan Sahi

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Akele Pedon Ka Toofan carries.