
राज करैए छांगुर
Raj Karaiye Changur
Buddhinath Mishra
7 verses · ~12 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~1 min
ज्ञान के आतंक में मेरे घर का अन्धेरा बाहर निकलने से डरता है
ज्ञानीजन हँसते हैं बन्द खिड़कियाँ देखकर उधड़े पलस्तर पर बने अकारण भुतैले चेहरों पर और सीलन से बजबजाती सीढ़ियों की रपटन पर
ज्ञान के साथ जिनके पास आई है अकूत सम्पदा और जो कृपण हैं मुझ जैसे दूसरों पर दृष्टिपात करने तक वे अब दर्प से मारते हैं लात मेरे जंग खाए गिराऊ दरवाज़े पर
तुम गधे के गधे ही रहे जिस तरह कपड़े के जूतों और नीले बन्द गले के रुई भरे कोटों में माओ के अनुयायी...
सर्वज्ञ, अगुआ ज्ञान-भण्डार के भट्टारक, महा-प्रज्ञ कटाक्ष करते हैं:
ख़ुद तो ऐसे ही रहा दीन-हीन लेकिन इसकी स्त्री ने कौनसा अपराध किया कि मुरझाई नीम चढ़ी गिलोय को दो बून्द पानी भी नसीब नहीं हुआ ।
इति

Paired Painting
King Dasharatha and Queen Kaikeyi in the Wrath Chamber
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Gyanijan carries.