
गामक लोक
Gamak Lok
Buddhinath Mishra
6 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
धधकती धूप में रामू खड़ा है खड़ा भुलभुल में बदलता पाँव रह रह बेचता अख़बार जिसमें बड़े सौदे हो रहे हैं ।
एक प्रति पर पाँच पैसे कमीशन है, और कम पर भी उसे वह बेच सकता है अगर हम तरस खायें, पाँच रूपये दें अगर ख़ैरात वह ले ले ।
लगी पूँजी हमारी है छपाई-कल हमारी है ख़बर हमको पता है, हमारा आतंक है, हमने बनाई है यहाँ चलती सड़क पर इस ख़बर को हम ख़रीदें क्यो? कमाई पाँच दस अख़बार भर की क्यों न जाने दें?
वहाँ जब छाँह में रामू दुआएँ दे रहा होगा ख़बर वातानुकूलित कक्ष में तय कर रही होगी करेगी कौन रामू के तले की भूमि पर कब्ज़ा ।
इति

Paired Painting
Princess Giving Golden Earring to Brahman Boy
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Akhbarwala carries.