लहर
Lahar
Rituraj
1 verse · ~7 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

1 verses · ~1 min
जीवन की आपाधापी में खोया खोया मन लगता है बड़ा अकेलापन लगता है दौड़ बड़ी है समय बहुत कम हार जीत के सारे मौसम कहाँ ढूंढ पाएँगे उसको जिसमें - अपनापन लगता है चैन कहाँ अब नींद कहाँ है बेचैनी की यह दुनिया है मर खप कर के- जितना जोड़ा कितना भी हो कम लगता है सफलताओं का नया नियम है न्यायमूर्ति की जेब गरम है झूठ बढ़ रहा- ऐसा हर पल सच में बौनापन लगता है खून ख़राबा मारा मारी कहाँ जाए जनता बेचारी आतंकों में- शांति खोजना केवल पागलपन लगता है
इति

Paired Painting
Draupadi and Krishna at Kurukshetra
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Khoya Khoya Man carries.