
घाटी की चिन्ता
Ghati Ki Chinta
Jagdish Gupta
3 verses · ~5 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

1 verses · ~1 min
फिर नदी की बात सुन कर चहचहाने लग गई है यह हरी घाटी हवा से बात कर के लहलहाने लग गई है झर रहे झरने हँसी के उड़ रहे तूफ़ान में स्वर रेशमी दुकूल जैसे बादलों के चीर नभ पर और धरती रातरानी को सजाने लग गई है यह हरी घाटी हवा से बात कर के महमहाने लग गई है गाड़ कर पेड़ों के झंडे बज रहे वर्षा के मादल आँजती वातायनों की चितवनों में सांझ काजल और बूँदों की मधुर आहट रिझाने लग गई है यह हरी घाटी हवा से बात कर के गुनगुनाने लग गई है
इति

Paired Painting
River Landscape with Boats
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Hari Ghati carries.