
सरिता
Sarita
Gopal Singh Nepali
15 verses · ~28 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Yeh Laghu Sarita Ka Bahta Jal
Gopal Singh Nepali9 verses · ~1 min
यह लघु सरिता का बहता जल
कितना शीतल, कितना निर्मल हिमगिरि के हिम से निकल निकल, यह निर्मल दूध सा हिम का जल, कर-कर निनाद कल-कल छल-छल,
तन का चंचल मन का विह्वल यह लघु सरिता का बहता जल
ऊँचे शिखरों से उतर-उतर, गिर-गिर, गिरि की चट्टानों पर, कंकड़-कंकड़ पैदल चलकर, दिन भर, रजनी भर, जीवन भर,
धोता वसुधा का अन्तस्तल यह लघु सरिता का बहता जल
हिम के पत्थर वो पिघल पिघल, बन गए धरा का वारि विमल, सुख पाता जिससे पथिक विकलच पी-पी कर अंजलि भर मृदुजल,
नित जलकर भी कितना शीतल यह लघु सरिता का बहता जल
कितना कोमल, कितना वत्सल, रे जननी का वह अन्तस्तल, जिसका यह शीतल करुणा जल, बहता रहता युग-युग अविरल,
गंगा, यमुना, सरयू निर्मल यह लघु सरिता का बहता जल
इति

Paired Painting
Hindoo Ghaut on the Ganges below Benares
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Yeh Laghu Sarita Ka Bahta Jal carries.