№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Rain Drops on Lotus Leaves

Shanta

आँगन से

Aangan Se

Sumitranandan Pant
1 min read 5 versesवर्षाrainआँगन

5 verses · ~1 min

रोमांचित हो उठे आज नव वर्षा के स्पर्शों से? छोटे से आँगन मेरे, तुम रीते थे वर्षों से! नव दूर्वा के हरे प्ररोहों से अब भरे मनोहर मरकत के टुकड़े से लगते तुम विजड़ित भू उर पर!

जन निवास से दूर, नीड़ में वन तरुओं के छिपकर, भू उरोज-से उभरे इस एकांत मौन भीटे पर कोमल शाद्वल अंचल पर लेटा मैं स्मित चिन्तापर, जीवन की हँसमुख हरीतिमा को देखूँ आँखें भर!

एक ओर गहरी खाई में सोया तरुओं का तम केका रव से चकित, बखेरे सुख स्वप्नों का संभ्रम! और दूसरी ओर मंजरित आम्र विपिन कर मुखरित मधु में पिक, पावस में पी-खग करे हृदय को हर्षित!

हरित भरित वन नीम उच्छ्वसित शाखाओं पर विह्वल वक्षभार, हाँ, रहे झुकाए मेरे ऊपर कोमल!

रचनाकाल: अगस्त’ ३९

इति

Sumitranandan Pant

The Poet

सुमित्रानंदन पंत

Sumitranandan Pant

Rain Drops on Lotus Leaves

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Rain Drops on Lotus Leaves

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aangan Se carries.