№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Gypsies

Karuna

मेरे गीत तुम्हारे

Mere Geet Tumhare

Pratibha Saxena
2 min read 4 versesगीतsongspain

4 verses · ~2 min

मेरे गीत तुम्हारे! ये अभाव के गान, किसी मानस की आकुल तान, व्यथा की क्षण-क्षण की अनुभूति, जहाँ पर आ कर बँधती! बात एक ही मेरी चाहे तेरी, जो पग-पग पर हारे! मेरे गीत तुम्हारे!

स्वप्निल पलकें खोल चले जग के रूखे आँगन में, वे जीवन के फूल जिन्हों ने मधु के दिवस न देखे बसने को पतझार चला जिन साँसोँ के कानन मे! वे अटके भटके से, बेबस जीवन के मारे, मेरे गीत तुम्हारे!

अधरों की मुस्कान, हृदय का क्रन्दन जहाँ मिलेँगे, करुणा-सिंचित कथा–कहानी, भले न मुख से फूटे, उस माटी मे गन्ध-विकल गीतोँ के फूल खिलेँगे! अश्रु-हास सुख-दुखमय जीवन चलता साथ तुम्हारे! मेरे गीत तुम्हारे!

मेरे स्वर ही मेरा परिचय, इतना-सा ही नाता, जगती की क्षणमयता और समय की लहरोँ मे भी एक यही संबंध जोड़ता मन से मन का नाता! हार गई जो अपनी बाजी लिखती नाम तुम्हारे मेरे गीत तुम्हारे!

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

Gypsies

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Gypsies

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mere Geet Tumhare carries.