
परीक्षा
Pariksha
Pratibha Saxena
2 verses · ~16 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~3 min
षड्मुख घूमि तीन लोकन में आइ चरन सिर नाये! स्रम से थकित आइ बइठे, देखित गणेश मुस्काये! 'गये न तुम ,काहे से अपनो वाहन देख डेराने?' 'पूरन काज कियो बुधि बल ते गजमुख परम सयाने गणपति पहिल बियाहे कन्या पहिल पूजि सनमाने!' शंकर कहिन ,'सबै साधन में श्रद्धा -बुधि है भारी!' गुस्सइले कुमार,' बातन से मोहे पितु महतारी , गई सबहिन की मति मारी !' 'समरथ औ सुभ-मति से पूरन उचित पात्र अधिकारी, इनका धारन करै बिस्व हित होवे मंगल कारी! तनबल ,मनबल और बुद्धिबल की हम लीन परीच्छा , जा सों होय सकारथ रिधि -सिधि हमरी इहै सदिच्छा!' शिकायत षड्मुख की भारी! 'पार्वती समुझावैं ,' तुम अति वीर महाबलधारी , साधन और उपाव सहज करि देत काज सब भारी! बल ते सरै न काज अगम, तब बुद्धि उपाय सुझावै , हर्र-फिटकरी बिना रंग पूरो-पूरो चढ़ि जावे! पूत तुम समुझौ बात हमारी!'
'बुद्धि वीर बे ,वे बाहु वीर तुम दोऊ मोर दुलारे , दुइ कन्यन सों दोनिउ भैया ब्याह करहु मोरे बारे!' खिन्न कुमार उठे बोले 'तुम जौन कहा हम कीन्हा , आज्ञा सिर धरि दौरि थक्यो तौहूँ जस नेक न दीन्हा! करो तुम ,जो भावै महतारी!
स्रम पुरुषारथ भयो अकारथ हम बियाह ना करिबे , उचटि गयो मन अब हम जाइ कहूँ अनतै ही रहिबे!' गौरा गनपति करैं निहोरे अइस कुमार रिसाने , बहुत करी विनती कर जोरे विधि निरास पछिताने ,
पसुपति करि परबोध थकाने केहू भाँति न मानै दोनिहुँ कन्या एकहि बर सों ब्याहन की तब ठाने! 'लिखी जो कउन सकै , टारी!'
भयो बियाह वेद विधि गिरिजा परिछन कीन्ह बधुन को , गौरा को परिवार निरखि अस अचरज देव वधुन को! गनपति पाये रिद्धिृसिद्धि द्वौ पुत्र लाभ-सुभ जनमे , सुर-मुनि सबै सिहात कामना करत कृपा की मन में! बिघनहर्ता गजमुख धारी!
इति

Paired Painting
Shankar
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kumar Ka Hath carries.