
एक दिन अति शान्त मन
Ek Din Ati Shant Man
Pratibha Saxena
7 verses · ~32 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

5 verses · ~2 min
समग्र शान्ति के लिए! कि जीव मात्र के लिए धरा कुटुम्ब ही रहे, वनों,समुद्र पर्वतों में शंख-ध्वनि गुँजारता .
अलग न भूमि खंड ये, अखंड है वसुन्धरा, हृदय विशाल हो मिलन समान मित्र-भाव का, न स्वार्थ साधना, न हो प्रवंचना, विडंबना, मिलो तो प्यार से मिलो, समुद्र मार्ग दे रहा! नई सदी मनुष्यता के पाठ बाँचती रहे, नवीन युग प्रवेश-द्वार में खड़ा निहारता!
ये वोल्गा .ये हाँगहो .फ़रात, नील, ज़ेम्बसी, धरा को बाँह में भरे ये ऊष्ण-शीत बंध भी, गगन,समीर,जल.अनल, सुदूर अंतरिक्ष तक, अखंड शान्ति व्याप्त हो विकास पथ सँवारती! सिहर रही अमेरिका के राकियों की शृंखला अमेज़नी तटों का अंधकार दीप्ति माँगता!
ज़हर न खेत में उगे, पुकारता है दारुवन, उदास हर कली हुई, चले न बारुदी पवन . कि रंग-भेद, नस्ल-धेद,पंथ-भेद अब न हों, मदान्ध द्वेष भस्म कर न दे कहीं सभी सपन धुआँ-धुआं हुआ पवन गुबार हिमित द्वीप के, सुदूर पूर्व में खड़ा हुआ फ़ुज़ी फुँकारता!
कि गंग सिंधु,ब्रह्मपुत्र,नर्मदा पुकारती, पुकारता है शोण नद, कि टेरती महानदी, अमोघ शान्ति-मंत्र--पाठ सृष्टि को सुना रही समुद्र संधि पर अड़ी खड़ी प्रबुद्ध भारती समृद्ध ऋद्धि-सिद्धि से धरा बने मनोरमा, मनुष्य की मनुष्य से बनी रहे समानता!
इति

Paired Painting
View of the Ghats at Benares
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Himalaya Pukarta carries.