№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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View of the Ghats at Benares

Shanta

हिमालया पुकारता

Himalaya Pukarta

Pratibha Saxena
2 min read 5 versesशांतिpeaceहिमालय

5 verses · ~2 min

समग्र शान्ति के लिए! कि जीव मात्र के लिए धरा कुटुम्ब ही रहे, वनों,समुद्र पर्वतों में शंख-ध्वनि गुँजारता .

अलग न भूमि खंड ये, अखंड है वसुन्धरा, हृदय विशाल हो मिलन समान मित्र-भाव का, न स्वार्थ साधना, न हो प्रवंचना, विडंबना, मिलो तो प्यार से मिलो, समुद्र मार्ग दे रहा! नई सदी मनुष्यता के पाठ बाँचती रहे, नवीन युग प्रवेश-द्वार में खड़ा निहारता!

ये वोल्गा .ये हाँगहो .फ़रात, नील, ज़ेम्बसी, धरा को बाँह में भरे ये ऊष्ण-शीत बंध भी, गगन,समीर,जल.अनल, सुदूर अंतरिक्ष तक, अखंड शान्ति व्याप्त हो विकास पथ सँवारती! सिहर रही अमेरिका के राकियों की शृंखला अमेज़नी तटों का अंधकार दीप्ति माँगता!

ज़हर न खेत में उगे, पुकारता है दारुवन, उदास हर कली हुई, चले न बारुदी पवन . कि रंग-भेद, नस्ल-धेद,पंथ-भेद अब न हों, मदान्ध द्वेष भस्म कर न दे कहीं सभी सपन धुआँ-धुआं हुआ पवन गुबार हिमित द्वीप के, सुदूर पूर्व में खड़ा हुआ फ़ुज़ी फुँकारता!

कि गंग सिंधु,ब्रह्मपुत्र,नर्मदा पुकारती, पुकारता है शोण नद, कि टेरती महानदी, अमोघ शान्ति-मंत्र--पाठ सृष्टि को सुना रही समुद्र संधि पर अड़ी खड़ी प्रबुद्ध भारती समृद्ध ऋद्धि-सिद्धि से धरा बने मनोरमा, मनुष्य की मनुष्य से बनी रहे समानता!

इति

Pratibha Saxena

The Poet

प्रतिभा सक्सेना

Pratibha Saxena

View of the Ghats at Benares

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View of the Ghats at Benares

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Himalaya Pukarta carries.