
तोरा मन दर्पण कहलाये
Tora Man Darpan Kahlaye
Sahir Ludhianvi
5 verses · ~17 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

Shanta
Kabhi Kabhi Khud Se Baat Karo
Kavi Pradeep4 verses · ~2 min
कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो। अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो। कभी कभी खुद से बात करो। कभी कभी खुद से बोलो।
हरदम तुम बैठे ना रहो -शौहरत की इमारत में। कभी कभी खुद को पेश करो आत्मा की अदालत में। केवल अपनी कीर्ति न देखो- कमियों को भी टटोलो। कभी कभी खुद से बात करो। कभी कभी खुद से बोलो।
दुनिया कहती कीर्ति कमा के, तुम हो बड़े सुखी। मगर तुम्हारे आडम्बर से, हम हैं बड़े दु:खी। कभी तो अपने श्रव्य-भवन की बंद खिड़कियाँ खोलो। कभी कभी खुद से बात करो। कभी कभी खुद से बोलो।
ओ नभ में उड़ने वालो, जरा धरती पर आओ। अपनी पुरानी सरल-सादगी फिर से अपनाओ। तुम संतो की तपोभूमि पर मत अभिमान में डालो। अपनी नजर में तुम क्या हो? ये मन की तराजू में तोलो। कभी कभी खुद से बात करो। कभी कभी खुद से बोलो।
इति

Paired Painting
King Janaka of Mithila
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kabhi Kabhi Khud Se Baat Karo carries.