№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
King Janaka of Mithila

Shanta

कभी कभी खुद से बात करो

Kabhi Kabhi Khud Se Baat Karo

Kavi Pradeep
2 min read 4 versesआत्मचिंतनself-reflectionमन

4 verses · ~2 min

कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो। अपनी नज़र में तुम क्या हो? ये मन की तराजू पर तोलो। कभी कभी खुद से बात करो। कभी कभी खुद से बोलो।

हरदम तुम बैठे ना रहो -शौहरत की इमारत में। कभी कभी खुद को पेश करो आत्मा की अदालत में। केवल अपनी कीर्ति न देखो- कमियों को भी टटोलो। कभी कभी खुद से बात करो। कभी कभी खुद से बोलो।

दुनिया कहती कीर्ति कमा के, तुम हो बड़े सुखी। मगर तुम्हारे आडम्बर से, हम हैं बड़े दु:खी। कभी तो अपने श्रव्य-भवन की बंद खिड़कियाँ खोलो। कभी कभी खुद से बात करो। कभी कभी खुद से बोलो।

ओ नभ में उड़ने वालो, जरा धरती पर आओ। अपनी पुरानी सरल-सादगी फिर से अपनाओ। तुम संतो की तपोभूमि पर मत अभिमान में डालो। अपनी नजर में तुम क्या हो? ये मन की तराजू में तोलो। कभी कभी खुद से बात करो। कभी कभी खुद से बोलो।

इति

Kavi Pradeep

The Poet

प्रदीप

Kavi Pradeep

King Janaka of Mithila

Paired Painting

King Janaka of Mithila

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kabhi Kabhi Khud Se Baat Karo carries.