
जाग तुझको दूर जाना
Jaag Tujhko Door Jaana
Mahadevi Varma
5 verses · ~24 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Veera
Jago Phir Ek Baar
Suryakant Tripathi 'Nirala'5 verses · ~2 min
जागो फिर एक बार! प्यार जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार- जागो फिर एक बार!
आँखे अलियों-सी किस मधु की गलियों में फँसी, बन्द कर पाँखें पी रही हैं मधु मौन अथवा सोयी कमल-कोरकों में?- बन्द हो रहा गुंजार- जागो फिर एक बार!
अस्ताचल चले रवि, शशि-छवि विभावरी में चित्रित हुई है देख यामिनीगन्धा जगी, एकटक चकोर-कोर दर्शन-प्रिय, आशाओं भरी मौन भाषा बहु भावमयी घेर रहा चन्द्र को चाव से शिशिर-भार-व्याकुल कुल खुले फूल झूके हुए, आया कलियों में मधुर मद-उर-यौवन उभार- जागो फिर एक बार!
पिउ-रव पपीहे प्रिय बोल रहे, सेज पर विरह-विदग्धा वधू याद कर बीती बातें, रातें मन-मिलन की मूँद रही पलकें चारु नयन जल ढल गये, लघुतर कर व्यथा-भार जागो फिर एक बार!
सहृदय समीर जैसे पोछों प्रिय, नयन-नीर शयन-शिथिल बाहें भर स्वप्निल आवेश में, आतुर उर वसन-मुक्त कर दो, सब सुप्ति सुखोन्माद हो, छूट-छूट अलस फैल जाने दो पीठ पर कल्पना से कोमन ऋतु-कुटिल प्रसार-कामी केश-गुच्छ। तन-मन थक जायें, मृदु सरभि-सी समीर में बुद्धि बुद्धि में हो लीन मन में मन, जी जी में, एक अनुभव बहता रहे उभय आत्माओं मे, कब से मैं रही पुकार जागो फिर एक बार!
इति
The Poet
Suryakant Tripathi 'Nirala'

Paired Painting
Bharat Mata
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Jago Phir Ek Baar carries.