№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Maharana Pratap Praying to Goddess at Haldighati

Veera

जाग तुझको दूर जाना

Jaag Tujhko Door Jaana

Mahadevi Varma
2 min read 5 versesजागरणकर्तव्यप्रेरणा

5 verses · ~2 min

चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना! जाग तुझको दूर जाना!

अचल हिमगिरि के हॄदय में आज चाहे कम्प हो ले! या प्रलय के आँसुओं में मौन अलसित व्योम रो ले; आज पी आलोक को ड़ोले तिमिर की घोर छाया जाग या विद्युत शिखाओं में निठुर तूफान बोले! पर तुझे है नाश पथ पर चिन्ह अपने छोड़ आना! जाग तुझको दूर जाना!

बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले? पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले? विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुनगुन, क्या डुबो देंगे तुझे यह फूल दे दल ओस गीले? तू न अपनी छाँह को अपने लिये कारा बनाना! जाग तुझको दूर जाना!

वज्र का उर एक छोटे अश्रु कण में धो गलाया, दे किसे जीवन-सुधा दो घँट मदिरा माँग लाया! सो गई आँधी मलय की बात का उपधान ले क्या? विश्व का अभिशाप क्या अब नींद बनकर पास आया? अमरता सुत चाहता क्यों मृत्यु को उर में बसाना? जाग तुझको दूर जाना!

कह न ठंढी साँस में अब भूल वह जलती कहानी, आग हो उर में तभी दृग में सजेगा आज पानी; हार भी तेरी बनेगी माननी जय की पताका, राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी! है तुझे अंगार-शय्या पर मृदुल कलियां बिछाना! जाग तुझको दूर जाना!

इति

Mahadevi Varma

The Poet

महादेवी वर्मा

Mahadevi Varma

Maharana Pratap Praying to Goddess at Haldighati

Paired Painting

Maharana Pratap Praying to Goddess at Haldighati

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Jaag Tujhko Door Jaana carries.