
कच्चे बखिए की तरह रिश्ते उधड़ जाते हैं
Kacche Bakhiye Ki Tarah Rishte Udhad Jate Hain
Nida Fazli
4 verses · ~8 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

5 verses · ~1 min
कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी चैन से जीने की सूरत ना हुई जिसको चाहा उसे अपना ना सके जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई
जिससे जब तक मिले दिल ही से मिले दिल जो बदला तो फसाना बदला रस्में दुनिया की निभाने के लिए हमसे रिश्तों की तिज़ारत[1] ना हुई
दूर से था वो कई चेहरों में पास से कोई भी वैसा ना लगा बेवफ़ाई भी उसी का था चलन फिर किसीसे भी शिकायत ना हुई
वक्त रूठा रहा बच्चे की तरह राह में कोई खिलौना ना मिला दोस्ती भी तो निभाई ना गई दुश्मनी में भी अदावत[2] ना हुई
शब्दार्थ:
इति

Paired Painting
Bheeshma's Oath
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kuch Tabiyat Hi Mili Thi carries.