
ये देश है वीर जवानों का
Ye Desh Hai Veer Jawanon Ka
Sahir Ludhianvi
6 verses · ~19 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

Veera
Shasan Chalta Talwar Se
Gopal Singh Nepali11 verses · ~6 min
शासन चलता तलवार से ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से । चरखा चलता है हाथों से, शासन चलता तरवार से ।।
यह राम-कृष्ण की जन्मभूमि, पावन धरती सीताओं की फिर कमी रही कब भारत में सभ्यता, शांति, सदभावों की पर नए पड़ोसी कुछ ऐसे, गोली चलती उस पार से । ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
तुम उड़ा कबूतर अंबर में संदेश शांति का देते हो चिट्ठी लिखकर रह जाते हो, जब कुछ गड़बड़ सुन लेते हो वक्तव्य लिखो कि विरोध करो, यह भी काग़ज़ वह भी काग़ज़ कब नाव राष्ट्र की पार लगी यों काग़ज़ की पतवार से । ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
तुम चावल भिजवा देते हो, जब प्यार पुराना दर्शाकर वह प्राप्ति सूचना देते हैं, सीमा पर गोली-वर्षा कर चुप रहने को तो हम इतना चुप रहें कि मरघट शर्माए बंदूकों से छूटी गोली कैसे चूमोगे प्यार से । ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
मालूम हमें है तेज़ी से निर्माण हो रहा भारत का चहुँ ओर अहिंसा के कारण गुणगान हो रहा भारत का पर यह भी सच है, आज़ादी है, तो ही चल रही अहिंसा है वरना अपना घर दीखेगा फिर कहाँ क़ुतुब मीनार से । ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
स्वातंत्र्य न निर्धन की पत्नी कि पड़ोसी जब चाहें छेड़ें यह वह पागलपन है जिसमें शेरों से लड़ जाती हैं भेड़ें पर यहाँ ठीक इसके उल्टे, हैं भेड़ छेड़ने वाले ही ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
नहरें फिर भी खुद सकती हैं, बन सकती है योजना नई जीवित है तो फिर कर लेंगे कल्पना नई, कामना नई घर की है बात, यहाँ 'बोतल' पीछे भी पकड़ी जाएगी पहले चलकर के सीमा पर सर झुकवा लो संसार से । ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
फिर कहीं ग़ुलामी आई तो, क्या कर लेंगे हम निर्भय भी स्वातंत्र्य सूर्य के साथ अस्त हो जाएगा सर्वोदय भी इसलिए मोल आज़ादी का नित सावधान रहने में है लड़ने का साहस कौन करे, फिर मरने को तैयार से । ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
तैयारी को भी तो थोड़ा चाहिए समय, साधन, सुविधा इसलिए जुटाओ अस्त्र-शस्त्र, छोड़ो ढुलमुल मन की दुविधा जब इतना बड़ा विमान तीस नखरे करता तब उड़ता है फिर कैसे तीस करोड़ समर को चल देंगे बाज़ार से । ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
हम लड़ें नहीं प्रण तो ठानें, रण-रास रचाना तो सीखें होना स्वतंत्र हम जान गए, स्वातंत्र्य बचाना तो सीखें वह माने सिर्फ़ नमस्ते से, जो हँसे, मिले, मृदु बात करे बंदूक चलाने वाला माने बमबारी की मार से । ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से ।।
सिद्धांत, धर्म कुछ और चीज़, आज़ादी है कुछ और चीज़ सब कुछ है तरु-डाली-पत्ते, आज़ादी है बुनियाद चीज़ इसलिए वेद, गीता, कुरआन, दुनिया ने लिखे स्याही से लेकिन लिक्खा आज़ादी का इतिहास रुधिर की धार से ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से । चर्खा चलता है हाथों से, शासन चलता तलवार से ।।
इति

Paired Painting
Shivaji Maharaj Killing Afzal Khan
This painting captures the legendary and pivotal moment in Maratha history when Chhatrapati Shivaji Maharaj encountered the Bijapur general Afzal Khan at the foothills of Pratapgad. It is a scene defined by immense courage, tactical brilliance, and the defense of sovereignty. The artist masterfully portrays the intensity of the struggle, stripping away the pretenses of diplomatic parley to reveal the visceral reality of a conflict that would alter the course of Indian history. Shivaji Maharaj appears composed yet fierce, embodying the spirit of self reliance and righteousness against an overwhelming force. We are invited to witness not just a battle, but a transformative act of liberation that remains etched in the soul of the Marathi people.
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Shasan Chalta Talwar Se carries.