№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Sakuntala Leaving for King Dushmanta's Palace

Karuna

बाबुल तुम बगिया के तरुवर

Babul Tum Bagiya Ke Taruvar

Gopal Singh Nepali
8 min read 14 versesबाबुलfatherविवाह

14 verses · ~8 min

बाबुल तुम बगिया के तरुवर, हम तरुवर की चिड़ियाँ रे दाना चुगते उड़ जाएँ हम, पिया मिलन की घड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें, ज्यों मोती की लडियां रे बाबुल तुम बगिया के तरुवर …….

आँखों से आँसू निकले तो पीछे तके नहीं मुड़के घर की कन्या बन का पंछी, फिरें न डाली से उड़के बाजी हारी हुई त्रिया की जनम -जनम सौगात पिया की बाबुल तुम गूंगे नैना, हम आँसू की फुलझड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आएँ ज्यों मोती की लडियाँ रे

हमको सुध न जनम के पहले , अपनी कहाँ अटारी थी आँख खुली तो नभ के नीचे , हम थे गोद तुम्हारी थी ऐसा था वह रैन -बसेरा जहाँ सांझ भी लगे सवेरा बाबुल तुम गिरिराज हिमालय , हम झरनों की कड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

छितराए नौ लाख सितारे , तेरी नभ की छाया में मंदिर -मूरत , तीरथ देखे , हमने तेरी काया में दुःख में भी हमने सुख देखा तुमने बस कन्या मुख देखा बाबुल तुम कुलवंश कमल हो , हम कोमल पंखुड़ियां रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

बचपन के भोलेपन पर जब , छिटके रंग जवानी के प्यास प्रीति की जागी तो हम , मीन बने बिन पानी के जनम -जनम के प्यासे नैना चाहे नहीं कुंवारे रहना बाबुल ढूंढ फिरो तुम हमको , हम ढूंढें बावरिया रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

चढ़ती उमर बढ़ी तो कुल -मर्यादा से जा टकराई पगड़ी गिरने के दर से , दुनिया जा डोली ले आई मन रोया , गूंजी शहनाई नयन बहे , चुनरी पहनाई पहनाई चुनरी सुहाग की , या डाली हथकड़ियां रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

मंत्र पढ़े सौ सदी पुराने , रीत निभाई प्रीत नहीं तन का सौदा कर के भी तो , पाया मन का मीत नहीं गात फूल सा , कांटे पग में जग के लिए जिए हम जग में बाबुल तुम पगड़ी समाज के , हम पथ की कंकरियां रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

मांग रची आंसू के ऊपर , घूंघट गीली आँखों पर ब्याह नाम से यह लीला ज़ाहिर करवाई लाखों पर

नेह लगा तो नैहर छूता , पिया मिले बिछुड़ी सखियाँ प्यार बताकर पीर मिली तो नीर बनीं फूटी अंखियाँ हुई चलाकर चाल पुरानी नयी जवानी पानी पानी चली मनाने चिर वसंत में , ज्यों सावन की झाड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

देखा जो ससुराल पहुंचकर , तो दुनिया ही न्यारी थी फूलों सा था देश हरा , पर कांटो की फुलवारी थी कहने को सारे अपने थे पर दिन दुपहर के सपने थे मिली नाम पर कोमलता के , केवल नरम कांकरिया रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

वेद-शास्त्र थे लिखे पुरुष के , मुश्किल था बचकर जाना हारा दांव बचा लेने को , पति को परमेश्वर जाना दुल्हन बनकर दिया जलाया दासी बन घर बार चलाया माँ बनकर ममता बांटी तो , महल बनी झोंपड़िया रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

मन की सेज सुला प्रियतम को , दीप नयन का मंद किया छुड़ा जगत से अपने को , सिंदूर बिंदु में बंद किया जंजीरों में बाँधा तन को त्याग -राग से साधा मन को पंछी के उड़ जाने पर ही , खोली नयन किवाड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

जनम लिया तो जले पिता -माँ , यौवन खिला ननद -भाभी ब्याह रचा तो जला मोहल्ला , पुत्र हुआ तो बंध्या भी जले ह्रदय के अन्दर नारी उस पर बाहर दुनिया सारी मर जाने पर भी मरघट में , जल - जल उठी लकड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

जनम -जनम जग के नखरे पर , सज -धजकर जाएँ वारी फिर भी समझे गए रात -दिन हम ताड़न के अधिकारी पहले गए पिया जो हमसे अधम बने हम यहाँ अधम से पहले ही हम चल बसें , तो फिर जग बाटें रेवड़ियां रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे

इति

Gopal Singh Nepali

The Poet

गोपाल सिंह नेपाली

Gopal Singh Nepali

Sakuntala Leaving for King Dushmanta's Palace

Paired Painting

Sakuntala Leaving for King Dushmanta's Palace

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Babul Tum Bagiya Ke Taruvar carries.