
काहे को ब्याहे बिदेस
Kahe Ko Byahe Bides
Amir Khusrow
10 verses · ~22 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Karuna
Babul Tum Bagiya Ke Taruvar
Gopal Singh Nepali14 verses · ~8 min
बाबुल तुम बगिया के तरुवर, हम तरुवर की चिड़ियाँ रे दाना चुगते उड़ जाएँ हम, पिया मिलन की घड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें, ज्यों मोती की लडियां रे बाबुल तुम बगिया के तरुवर …….
आँखों से आँसू निकले तो पीछे तके नहीं मुड़के घर की कन्या बन का पंछी, फिरें न डाली से उड़के बाजी हारी हुई त्रिया की जनम -जनम सौगात पिया की बाबुल तुम गूंगे नैना, हम आँसू की फुलझड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आएँ ज्यों मोती की लडियाँ रे
हमको सुध न जनम के पहले , अपनी कहाँ अटारी थी आँख खुली तो नभ के नीचे , हम थे गोद तुम्हारी थी ऐसा था वह रैन -बसेरा जहाँ सांझ भी लगे सवेरा बाबुल तुम गिरिराज हिमालय , हम झरनों की कड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
छितराए नौ लाख सितारे , तेरी नभ की छाया में मंदिर -मूरत , तीरथ देखे , हमने तेरी काया में दुःख में भी हमने सुख देखा तुमने बस कन्या मुख देखा बाबुल तुम कुलवंश कमल हो , हम कोमल पंखुड़ियां रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
बचपन के भोलेपन पर जब , छिटके रंग जवानी के प्यास प्रीति की जागी तो हम , मीन बने बिन पानी के जनम -जनम के प्यासे नैना चाहे नहीं कुंवारे रहना बाबुल ढूंढ फिरो तुम हमको , हम ढूंढें बावरिया रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
चढ़ती उमर बढ़ी तो कुल -मर्यादा से जा टकराई पगड़ी गिरने के दर से , दुनिया जा डोली ले आई मन रोया , गूंजी शहनाई नयन बहे , चुनरी पहनाई पहनाई चुनरी सुहाग की , या डाली हथकड़ियां रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
मंत्र पढ़े सौ सदी पुराने , रीत निभाई प्रीत नहीं तन का सौदा कर के भी तो , पाया मन का मीत नहीं गात फूल सा , कांटे पग में जग के लिए जिए हम जग में बाबुल तुम पगड़ी समाज के , हम पथ की कंकरियां रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
मांग रची आंसू के ऊपर , घूंघट गीली आँखों पर ब्याह नाम से यह लीला ज़ाहिर करवाई लाखों पर
नेह लगा तो नैहर छूता , पिया मिले बिछुड़ी सखियाँ प्यार बताकर पीर मिली तो नीर बनीं फूटी अंखियाँ हुई चलाकर चाल पुरानी नयी जवानी पानी पानी चली मनाने चिर वसंत में , ज्यों सावन की झाड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
देखा जो ससुराल पहुंचकर , तो दुनिया ही न्यारी थी फूलों सा था देश हरा , पर कांटो की फुलवारी थी कहने को सारे अपने थे पर दिन दुपहर के सपने थे मिली नाम पर कोमलता के , केवल नरम कांकरिया रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
वेद-शास्त्र थे लिखे पुरुष के , मुश्किल था बचकर जाना हारा दांव बचा लेने को , पति को परमेश्वर जाना दुल्हन बनकर दिया जलाया दासी बन घर बार चलाया माँ बनकर ममता बांटी तो , महल बनी झोंपड़िया रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
मन की सेज सुला प्रियतम को , दीप नयन का मंद किया छुड़ा जगत से अपने को , सिंदूर बिंदु में बंद किया जंजीरों में बाँधा तन को त्याग -राग से साधा मन को पंछी के उड़ जाने पर ही , खोली नयन किवाड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
जनम लिया तो जले पिता -माँ , यौवन खिला ननद -भाभी ब्याह रचा तो जला मोहल्ला , पुत्र हुआ तो बंध्या भी जले ह्रदय के अन्दर नारी उस पर बाहर दुनिया सारी मर जाने पर भी मरघट में , जल - जल उठी लकड़ियाँ रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
जनम -जनम जग के नखरे पर , सज -धजकर जाएँ वारी फिर भी समझे गए रात -दिन हम ताड़न के अधिकारी पहले गए पिया जो हमसे अधम बने हम यहाँ अधम से पहले ही हम चल बसें , तो फिर जग बाटें रेवड़ियां रे उड़ जाएँ तो लौट न आयें , ज्यों मोती की लडियां रे
इति

Paired Painting
Sakuntala Leaving for King Dushmanta's Palace
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Babul Tum Bagiya Ke Taruvar carries.