
फसल
Fasal
Nagarjun
2 verses · ~10 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shanta
Shayad Kohre Mein Na Bhi Dikhe
Nagarjun3 verses · ~1 min
वो गया वो गया बिल्कुल ही चला गया पहाड़ की ओट में
लाल-लाल गोला सूरज का शायद सुबह-सुबह दीख जाए पूरब में शायद कोहरे में न भी दीखे! फ़िलहाल वो डूबता-डूबता दीख गया! दिनान्त का आरक्त भास्कर जेठ के उजले पाख की नौवीं साँझ पसारेगी अपना आँचल अभी-अभी हिम्मत न होगी तमिस्रा को धरती पर झाँकने की! सहमी-सहमी-सी वो प्रतीक्षा करेगी उधर, उस ओर खण्डहर की ओट में! जी हाँ, परित्यक्त राजधानी के खण्डहरोंवाले उन उदास झुरमुटों में तमिस्रा करेगी इन्तज़ार दो बजे रात तक यानि तिथिक्रम के हिसाब से, आधी धुली चाँदनी तब तक खिली रहेगी फिर, तमिस्रा का नम्बर आएगा! यानि अन्धकार का!
1984 में रचित
इति

Paired Painting
Benares, the banks of the Ganges
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Shayad Kohre Mein Na Bhi Dikhe carries.