№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Taming the Bull

Veera

ये अनाज की पूलें तेरे काँधें झूलें

Ye Anaaj Ki Poolen Tere Kaandhen Jhoolen

Makhanlal Chaturvedi
1 min read 1 versesअनाजgrainमेहनतकश

1 verses · ~1 min

ये अनाज की पूलें तेरे काँधें झूलें तेरा चौड़ा छाता रे जन-गण के भ्राता शिशिर, ग्रीष्म, वर्षा से लड़ते भू-स्वामी, निर्माता! कीच, धूल, गन्दगी बदन पर लेकर ओ मेहनतकश! गाता फिरे विश्व में भारत तेरा ही नव-श्रम-यश! तेरी एक मुस्कराहट पर वीर पीढ़ियाँ फूलें । ये अनाज की पूलें तेरे काँधें झूलें! इन भुजदंडों पर अर्पित सौ-सौ युग, सौ-सौ हिमगिरी सौ-सौ भागीरथी निछावर तेरे कोटि-कोटि शिर! ये उगी बिन उगी फ़सलें तेरी प्राण कहानी हर रोटी ने, रक्त बूँद ने तेरी छवि पहचानी! वायु तुम्हारी उज्ज्वल गाथा सूर्य तुम्हारा रथ है, बीहड़ काँटों भरा कीचमय एक तुम्हारा पथ है । यह शासन, यह कला, तपस्या तुझे कभी मत भूलें । ये अनाज की पूलें तेरे काँधें झूलें!

इति

Makhanlal Chaturvedi

The Poet

माखनलाल चतुर्वेदी

Makhanlal Chaturvedi

Taming the Bull

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Taming the Bull

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