
रात में भी
Raat Mein Bhi
Divik Ramesh
6 verses · ~11 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
समय के समर्थ अश्व मान लो आज बन्धु! चार पाँव ही चलो। छोड़ दो पहाड़ियाँ, उजाड़ियाँ तुम उठो कि गाँव-गाँव ही चलो।।
रूप फूल का कि रंग पत्र का बढ़ चले कि धूप-छाँव ही चलो।। समय के समर्थ उश्व मान लो आज बन्धु! चार पाँव ही चलो।।
वह खगोल के निराश स्वप्न-सा तीर आज आर-पार हो गया आँधियों भरे अ-नाथ बोल तो आज प्यार! क्यों उदार हो गया?
इस मनुष्य का ज़रा मज़ा चखो किन्तु यार एक दाँव ही चलो।। समय के समर्थ अश्व मान लो आज बन्धु! चार पाँव ही चलो।।
इति

Paired Painting
Rajput Warrior on Horseback
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Samay Ke Samarth Ashva carries.