№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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King Shantanu Meets Ganga and Young Devavrata

Shringara

मैं अपने से डरती हूँ सखि

Main Apne Se Darti Hoon Sakhi

Makhanlal Chaturvedi
2 min read 7 versesयौवनभयनर्मदा

7 verses · ~2 min

मैं अपने से डरती हूँ सखि!

पल पर पल चढ़ते जाते हैं, पद-आहट बिन, रो! चुपचाप बिना बुलाये आते हैं दिन, मास, वरस ये अपने-आप; लोग कहें चढ़ चली उमर में पर मैं नित्य उतरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि!

मैं बढ़ती हूँ? हाँ; हरि जानें यह मेरा अपराध नहीं है, उतर पड़ूँ यौवन के रथ से ऐसी मेरी साध नहीं है; लोग कहें आँखें भर आईं, मैं नयनों से झरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि!

किसके पंखों पर, भागी जाती हैं मेरी नन्हीं साँसें? कौन छिपा जाता है मेरी साँसों में अनगिनी उसाँसें? लोग कहें उन पर मरती है मैं लख उन्हें उभरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि !

सूरज से बेदाग, चाँद से रहे अछूती, मंगल-वेला, खेला करे वही प्राणों में, जो उस दिन प्राणों पर खेला, लोग कहें उन आँखों डूबी, मैं उन आँखों तरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि!

जब से बने प्राण के बन्धन, छूट गए गठ-बन्धन रानी, लिखने के पहले बन बैठी, मैं ही उनकी प्रथम कहानी, लोग कहें आँखें बहती हैं; उनके चरण भिगोने आयें, जिस दिन शैल-शिखिरियाँ उनको रजत मुकुट पहनाने आयें, लोग कहें, मैं चढ़ न सकूँगी- बोझीली; प्रण करती हूँ सखि!

मैं नर्मदा बनी उनके, प्राणों पर नित्य लहरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि!

इति

Makhanlal Chaturvedi

The Poet

माखनलाल चतुर्वेदी

Makhanlal Chaturvedi

King Shantanu Meets Ganga and Young Devavrata

Paired Painting

King Shantanu Meets Ganga and Young Devavrata

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