
तुम मिले
Tum Mile
Makhanlal Chaturvedi
6 verses · ~17 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Main Apne Se Darti Hoon Sakhi
Makhanlal Chaturvedi7 verses · ~2 min
मैं अपने से डरती हूँ सखि!
पल पर पल चढ़ते जाते हैं, पद-आहट बिन, रो! चुपचाप बिना बुलाये आते हैं दिन, मास, वरस ये अपने-आप; लोग कहें चढ़ चली उमर में पर मैं नित्य उतरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि!
मैं बढ़ती हूँ? हाँ; हरि जानें यह मेरा अपराध नहीं है, उतर पड़ूँ यौवन के रथ से ऐसी मेरी साध नहीं है; लोग कहें आँखें भर आईं, मैं नयनों से झरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि!
किसके पंखों पर, भागी जाती हैं मेरी नन्हीं साँसें? कौन छिपा जाता है मेरी साँसों में अनगिनी उसाँसें? लोग कहें उन पर मरती है मैं लख उन्हें उभरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि !
सूरज से बेदाग, चाँद से रहे अछूती, मंगल-वेला, खेला करे वही प्राणों में, जो उस दिन प्राणों पर खेला, लोग कहें उन आँखों डूबी, मैं उन आँखों तरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि!
जब से बने प्राण के बन्धन, छूट गए गठ-बन्धन रानी, लिखने के पहले बन बैठी, मैं ही उनकी प्रथम कहानी, लोग कहें आँखें बहती हैं; उनके चरण भिगोने आयें, जिस दिन शैल-शिखिरियाँ उनको रजत मुकुट पहनाने आयें, लोग कहें, मैं चढ़ न सकूँगी- बोझीली; प्रण करती हूँ सखि!
मैं नर्मदा बनी उनके, प्राणों पर नित्य लहरती हूँ सखि! मैं अपने से डरती हूँ सखि!
इति

Paired Painting
King Shantanu Meets Ganga and Young Devavrata
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Main Apne Se Darti Hoon Sakhi carries.