№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Death of Jatayu

Karuna

जागना अपराध

Jagna Aparadh

Makhanlal Chaturvedi
1 min read 2 versesअपराधcrimeमौत

2 verses · ~1 min

जागना अपराध! इस विजन-वन गोद में सखि, मुक्ति-बन्धन-मोद में सखि, विष-प्रहार-प्रमोद में सखि,

मृदुल भावों स्नेह दावों अश्रु के अगणित अभावों का शिकारी- आ गया विध व्याध; जागना अपराध! बंक वाली, भौंह काली, मौत, यह अमरत्व ढाली, कस्र्ण धन-सी, तरल घन -सी सिसकियों के सघन वन-सी, श्याम-सी, ताजे, कटे-से, खेत-सी असहाय, कौन पूछे? पुस्र्ष या पशु आय चाहे जाय, खोलती सी शाप, कसकर बाँधती वरदान- पाप में- कुछ आप खोती आप में- कुछ मान। ध्यान में, घुन में, हिये में, घाव में, शर में, आँख मूँदें, ले रही विष को- अमृत के भाव! अचल पलक, अचंचला पुतली युगों के बीच, दबी-सी, उन तरल बूँदों से कलेजा सींच, खूब अपने से लपेट-लपेट परम अभाव, चाव से बोली, प्रलय की साध- जागना अपराध!

इति

Makhanlal Chaturvedi

The Poet

माखनलाल चतुर्वेदी

Makhanlal Chaturvedi

Death of Jatayu

Paired Painting

Death of Jatayu

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Jagna Aparadh carries.