№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Woman Lighting a Lamp

Shanta

तम में बनकर दीप

Tam Mein Bankar Deep

Mahadevi Varma
1 min read 4 versesदीपकअंधकारस्वप्न

4 verses · ~1 min

उर तिमिरमय घर तिमिरमय चल सजनि दीपक बार ले!

राह में रो रो गये हैं रात और विहान तेरे काँच से टूटे पड़े यह स्वप्न, भूलें, मान तेरे; फूलप्रिय पथ शूलमय पलकें बिछा सुकुमार ले!

तृषित जीवन में घिर घन- बन; उड़े जो श्वास उर से; पलक-सीपी में हुए मुक्ता सुकोमल और बरसे; मिट रहे नित धूलि में तू गूँथ इनका हार ले!

मिलन वेला में अलस तू सो गयी कुछ जाग कर जब, फिर गया वह, स्वप्न में मुस्कान अपनी आँक कर तब। आ रही प्रतिध्वनि वही फिर नींद का उपहार ले! चल सजनि दीपक बार ले!

इति

Mahadevi Varma

The Poet

महादेवी वर्मा

Mahadevi Varma

Woman Lighting a Lamp

Paired Painting

Woman Lighting a Lamp

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Tam Mein Bankar Deep carries.