
झिलमिल तारे
Jhilmil Tare
Subhadra Kumari Chauhan
6 verses · ~13 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Shringara
Main Priya Pahchani Nahin
Mahadevi Varma6 verses · ~2 min
पथ देख बिता दी रैन मैं प्रिय पहचानी नहीं!
तम ने धोया नभ-पंथ सुवासित हिमजल से; सूने आँगन में दीप जला दिये झिल-मिल से; आ प्रात बुझा गया कौन अपरिचित, जानी नहीं! मैं प्रिय पहचानी नहीं!
धर कनक-थाल में मेघ सुनहला पाटल सा, कर बालारूण का कलश विहग-रव मंगल सा, आया प्रिय-पथ से प्रात- सुनायी कहानी नहीं! मैं प्रिय पहचानी नहीं!
नव इन्द्रधनुष सा चीर महावर अंजन ले, अलि-गुंजित मीलित पंकज- -नूपुर रूनझुन ले, फिर आयी मनाने साँझ मैं बेसुध मानी नहीं! मैं प्रिय पहचानी नहीं!
इन श्वासों का इतिहास आँकते युग बीते; रोमों में भर भर पुलक लौटते पल रीते; यह ढुलक रही है याद नयन से पानी नहीं! मैं प्रिय पहचानी नहीं!
अलि कुहरा सा नभ विश्व मिटे बुद्बुद्-जल सा; यह दुख का राज्य अनन्त रहेगा निश्चल सा; हूँ प्रिय की अमर सुहागिनि पथ की निशानी नहीं! मैं प्रिय पहचानी नहीं!
इति

Paired Painting
Swarna Mohini
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