
मेरे देश की आँखें
Mere Desh Ki Aankhen
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Agyeya'
5 verses · ~18 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~2 min
कोई लोहा पीटता है कोई छाती पीटता है पर यह क्या करीम भाई तुम हवा को पीट रहे हो
लोहा पीटना पूरा काम है और छाती पीटना मुकम्मल बेबसी मगर यह हवा को पीटना
कुछ लोग हवा बाँधना जानते हैं तो कुछ हवा पलटना कोई हवा उड़ाता है तो कोई हवा बनाता है कुछ बचे-खुचे लोग कम से कम हवा की चाल पहचानते हैं
एक तुम हो कि हवा को पीट रहे हो घण्टों हवा में लाठी भाँजते-भाँजते पसीने से लथपथ हो रहे हो
हवा तो वैसे भी पिटती रहती है बन्दूक की गोली छाती भेदने से पहले हवा को छेदती है चाँटा हवा को पीट कर ही किसी के गाल पर बरसता है फिर भला हवा को अलग से क्या पीटना
मान गया करीम भाई जब हर चीज़ के साथ हवा पिटती है तो क्यों न कोई हवा को पीटे कि इसके पिटने से एक दिन वह भी पिट जाएगा जिसे हम पीटना चाहते हैं!
इति

Paired Painting
Bhima in the Kurukshetra War
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Karim Bhai carries.