№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Bhima in the Kurukshetra War

Shanta

करीम भाई

Karim Bhai

Madan Kashyap
2 min read 6 versesहवाwindबेबसी

6 verses · ~2 min

कोई लोहा पीटता है कोई छाती पीटता है पर यह क्या करीम भाई तुम हवा को पीट रहे हो

लोहा पीटना पूरा काम है और छाती पीटना मुकम्मल बेबसी मगर यह हवा को पीटना

कुछ लोग हवा बाँधना जानते हैं तो कुछ हवा पलटना कोई हवा उड़ाता है तो कोई हवा बनाता है कुछ बचे-खुचे लोग कम से कम हवा की चाल पहचानते हैं

एक तुम हो कि हवा को पीट रहे हो घण्टों हवा में लाठी भाँजते-भाँजते पसीने से लथपथ हो रहे हो

हवा तो वैसे भी पिटती रहती है बन्दूक की गोली छाती भेदने से पहले हवा को छेदती है चाँटा हवा को पीट कर ही किसी के गाल पर बरसता है फिर भला हवा को अलग से क्या पीटना

मान गया करीम भाई जब हर चीज़ के साथ हवा पिटती है तो क्यों न कोई हवा को पीटे कि इसके पिटने से एक दिन वह भी पिट जाएगा जिसे हम पीटना चाहते हैं!

इति

Madan Kashyap

The Poet

मदन कश्यप

Madan Kashyap

Bhima in the Kurukshetra War

Paired Painting

Bhima in the Kurukshetra War

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Karim Bhai carries.