№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Parashurama, the Sixth Avatar of Lord Vishnu

Veera

कवि वही

Kavi Vahi

Jagdish Gupta
2 min read 4 versesकविpoetकविता

4 verses · ~2 min

कवि वही जो अकथनीय कहे किंतु सारी मुखरता के बीच मौन रहे शब्द गूँथे स्वयं अपने गूथने पर कभी रीझे कभी खीझे कभी बोल सहे कवि वही जो अकथनीय कहे

सिद्ध हो जिसको मनोमय मुक्ति का सौंदर्य साधन भाव झंकृति रूप जिसका अलंकृति जिसका प्रसाधन सिर्फ़ अपना ही नहीं सबका ताप जिसे दहे रूष्ट हो तो जगा दे आक्रोश नभ का द्रवित हो तो सृष्टि सारी साथ-साथ बहे।

शक्ति के संचार से या अर्थ के संभार से प्रबल झंझावात से या घात-प्रत्याघात से जहां थकने लगे वाणी स्वयं हाथ गहे।

शांति मन में क्रांति का संकल्प लेकर टिकी हो कहीं भी गिरवी न हो ईमान जिसका कहीं भी प्रज्ञा न जिसकी बिकी हो जो निरंतर नयी रचना-धर्मिता से रहे पूरित लेखनी जिसकी कलुष में डूब कर भी विशद उज्जवल कीर्ति लाभ लहे कवि वही जो अकथनीय कहे

इति

Jagdish Gupta

The Poet

जगदीश गुप्त

Jagdish Gupta

Parashurama, the Sixth Avatar of Lord Vishnu

Paired Painting

Parashurama, the Sixth Avatar of Lord Vishnu

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Kavi Vahi carries.