
तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
Tumhare Paav Ke Neeche Koi Zameen Nahi
Dushyant Kumar
7 verses · ~13 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

Hasya
Tepa Sammelan Ke Liye Ghazal
Dushyant Kumar13 verses · ~2 min
याद आता है कि मैं हूँ शंकरन या मंकरन आप रुकिेए फ़ाइलों में देख आता हूँ मैं
हैं ये चिंतामन अगर तो हैं ये नामों में भ्रमित इनको दारु की ज़रूरत है ये बतलाता हूँ मैं
मार खाने की तबियत हो तो भट्टाचार्य की गुलगुली चेहरा उधारी मांग कर लाता हूँ मैं
इनका चेहरा है कि हुक्का है कि है गोबर-गणेश किस कदर संजीदगी यह सबको समझाता हूँ मैं
उस नई कविता पे मरती ही नहीं हैं लड़कियाँ इसलिये इस अखाड़े में नित गज़ल गाता हूँ मैं
कौन कहता है निगम को और शिव को आदमी ये बड़े शैतान मच्छर हैं ये समझाता हूँ मैं
ये सुमन उज्जैन का है इसमें खुशबू तक नहीं दिल फ़िदा है इसकी बदबू पर कसम खाता हूँ मैं
इससे ज्यादा फ़ितरती इससे हरामी आदमी हो न हो दुनिया में पर उज्जैन में पाता हूँ मैं
पूछते हैं आप मुझसे उसका हुलिया, उसका हाल भगवती शर्मा को करके फ़ोन बुलवाता हूँ मैं
वो अवंतीलाल अब धरती पे चलता ही नहीं एक गुटवारे-सी उसकी शख़्सियत पाता हूँ मैं
सबसे ज़्यादा कीमती चमचा हूँ मैं सरकार का नाम है मेरा बसंती, राव कहलाता हूँ मैं
प्यार से चाहे शरद की मार लो हर एक गोट वैसे वो शतरंज का माहिर है, बतलाता हूँ मैं
(रचनाकाल: 1 अप्रैल 1975 के करीब)
इति

Paired Painting
Ganesha Transcribing the Mahabharata
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Tepa Sammelan Ke Liye Ghazal carries.