№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Flood Dear Flood

Raudra

अब किसी को भी नज़र आती नहीं कोई दरार

Ab Kisi Ko Bhi Nazar Aati Nahi Koi Darar

Dushyant Kumar
1 min read 8 versesग़ज़लghazalराजनीति

8 verses · ~1 min

अब किसी को भी नज़र आती नहीं कोई दरार घर की हर दीवार पर चिपके हैं इतने इश्तहार

आप बच कर चल सकें ऐसी कोई सूरत नहीं रहगुज़र घेरे हुए मुर्दे खड़े हैं बेशुमार

रोज़ अखबारों में पढ़कर यह ख़्याल आया हमें इस तरफ़ आती तो हम भी देखते फ़स्ले—बहार

मैं बहुत कुछ सोचता रहता हूँ पर कहता नहीं बोलना भी है मना सच बोलना तो दरकिनार

इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके—जुर्म हैं आदमी या तो ज़मानत पर रिहा है या फ़रार

हालते—इन्सान पर बरहम न हों अहले—वतन वो कहीं से ज़िन्दगी भी माँग लायेंगे उधार

रौनक़े-जन्नत ज़रा भी मुझको रास आई नहीं मैं जहन्नुम में बहुत ख़ुश था मेरे परवरदिगार

दस्तकों का अब किवाड़ों पर असर होगा ज़रूर हर हथेली ख़ून से तर और ज़्यादा बेक़रार

इति

Dushyant Kumar

The Poet

दुष्यंत कुमार

Dushyant Kumar

Flood Dear Flood

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Flood Dear Flood

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Ab Kisi Ko Bhi Nazar Aati Nahi Koi Darar carries.