№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Kunti and Surya

Shanta

सुबह-सुबह सूरज ने पूछा

Subah-Subah Suraj Ne Puchha

Dhananjay Singh
2 min read 7 versesसूरजsunरचना

7 verses · ~2 min

सुबह-सुबह सूरज ने पूछा कहाँ बिताई रात कहो

कोई रचना आ चुपके से कानों में बतियाई या कि नए भावों की कोई आहट पड़ी सुनाई क्या कोई ऐसा विचार था जिसने नींद उडाई या फिर परी-लोक की छवि सपनों में रही समाई

या कि राह में अड़ा रहा मन का कोई आघात कहो.

कोई गीत नहीं रच पाए क्या करते रहते हो जगत-दिखावे को ही क्या कागज़ काले करते हो क्या मंचों पर ताली बजवाना है चाह तुम्हारी सच-सच बोलो क्या है रचनाओं की राह तुम्हारी

क्यों मन करता तुम पर ऐसे प्रश्नों की बरसात कहो.

उतर कहीं से आया कोई मन में धीरे-धीरे या कि कहीं मिल गए भाव के उज्ज्वल मोती-हीरे नूतन बिम्ब उभर कर कोई शब्दों में आया है या फिर कोई गीत जन्म लेने को अकुलाया है

यदि ऐसा है तो फिर उसको हँस कर 'शुभ सुप्रभात' कहो!

इति

Dhananjay Singh

The Poet

धनंजय सिंह

Dhananjay Singh

Kunti and Surya

Paired Painting

Kunti and Surya

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Subah-Subah Suraj Ne Puchha carries.