№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Kalantaka Shiva Saving Markandeya

Veera

गाओ कि जिये जीवन

Gao Ki Jiye Jivan

Chandrasen Virat
2 min read 4 versesगीतsongजिजीविषा

4 verses · ~2 min

गंधर्व, गीत के ओ! कबसे पुकारता हूँ आओ कि मौत सहमे, गाओ कि जिए जीवन ।

यह निपट अकेलापन, मन की रुई न धुन दे यह मौत कहीं मुझको, दीवार में न चुन दे पाया मुझे अकेला, धमका दिया मरण ने ज़िंदा रखा अभी तक, बस गीत की शरण ने आओ न तुम अगर तो अवसर मिले व्यथा को सब वक्ष के व्रणों की देगी उधेड़ सीवन ।

ईंधन बचा हुआ है, ब़ाकी अभी अगन है हम नित्य गा रहे तो यह ज़िंदगी मगन है वैसे मरण-महावर पर पाँव में रचा है मारा गया बहुत पर, जीवन अभी बचा है अनुपात यह हमेशा, यों ही बना रहे तो हो अश्रु-ताप पर अब चंदन-सुहास लेपन ।

गाओ कि गीत से ही, धरती, गगन, दिशा है स्वर शेष, साँस, स्पंदन, ब़ाकी जिजीविषा है देखो कि गीत वाला स्वर मंद हो न जाए यह द्वार खुला जीवन का, बंद हो न जाए जीते न मौत बाज़ी, हारे न कभी जीवन अर्थी इधर, उधर हो, नव-जन्म-थाल-वादन ।

इति

Chandrasen Virat

The Poet

चंद्रसेन विराट

Chandrasen Virat

Kalantaka Shiva Saving Markandeya

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Kalantaka Shiva Saving Markandeya

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Gao Ki Jiye Jivan carries.