
क्षतशीश, मगर नतशीश नहीं
Kshatshish, Magar Natshish Nahi
Jagdish Gupta
5 verses · ~20 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

8 verses · ~1 min
दिल में राज़ दफ़न रखता है उँगली में धड़कन रखता है। पूछो मत तासीर जुनूँ की सिर पर बाँध कफ़न रखता है।
वह मड़ई का राजकुँवर हैं धारदार उसके सपने भी देवदारु-सा पौरुष उसका जलते हैं उससे अपने भी
दिखता भले शिला-सा शीतल उर में तेज़ अगन रखता है।
वह खंडहर की मूरत, जलता आँधी में दीप सरीखा कंगन-कुंकुम बनकर उसने श्मशानों में पलना सीखा
पग में नृत्य प्रलय का, कर में नूतन विश्व-सृजन रखता है।
वह उठता धरती से जैसे अंकुर फूटा हो भूतल से वह गिरता भी तो जैसे आशीष बरसता गगनांचल से
सूरज-चाँद उसी के, मुट्ठी में उनचास पवन रखता है।
(रचनाकाल: 05.07.2002)
इति

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Kutch Horseman
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Uttama-Purusha carries.