
वीरों का हो कैसा वसन्त
Veeron Ka Ho Kaisa Vasant
Subhadra Kumari Chauhan
7 verses · ~21 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

3 verses · ~1 min
यदि रक्त बूँद भर भी होगा कहीं बदन में नस एक भी फड़कती होगी समस्त तन में । यदि एक भी रहेगी बाक़ी तरंग मन में । हर एक साँस पर हम आगे बढ़े चलेंगे । वह लक्ष्य सामने है पीछे नहीं टलेंगे ।।
मंज़िल बहुत बड़ी है पर शाम ढल रही है । सरिता मुसीबतों की आग उबल रही है । तूफ़ान उठ रहा है, प्रलयाग्नि जल रही है । हम प्राण होम देंगे, हँसते हुए जलेंगे । पीछे नहीं टलेंगे, आगे बढ़े चलेंगे ।।
अचरज नहीं कि साथी भग जाएँ छोड़ भय में । घबराएँ क्यों, खड़े हैं भगवान जो हृदय में । धुन ध्यान में धँसी है, विश्वास है विजय में । बस और चाहिए क्या, दम एकदम न लेंगे । जब तक पहुँच न लेंगे, आगे बढ़े चलेंगे ।।
इति

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Tarabai in Command
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Aage Badhe Chalenge carries.