№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Kaikeyi and Manthara

Hasya

पण्डवानी

Pandwani

Buddhinath Mishra
1 min read 9 versesव्यंग्यsatireराजनीति

9 verses · ~1 min

एक था राजा, एक थी रानी मेरी तेरी है पण्डवानी ।

राजा राजजात का भेड़ा रानी थी बेताल पचीसी राजा की दाढ़ी में तिनका रानी ख़तरनाक मकड़ी-सी

ऐसे में मत कर नादानी बाँध के रखियो बोली-बानी ।

राजा था ग़ुलाम रानी का रानी थी उस्ताद तिरंगी नाक रगड़वाती थी सबसे सोचो बस तलवार थी नंगी

परजा बस मूरख अज्ञानी माँगे उससे दाना-पानी ।

किन्तु आग जंगल की फैली जिसमें राख हुआ नौमहला पिघल गया वह भी लपटों में राजा निरा मोम का पुतला

बंसी बजा न पाया नीरो रुतबा गया, गयी परधानी ।

आया एक सिंह गिरिवन से भौंक उठे कुत्ते गलियों में राजा घुसा सियारों के घर रानी शामिल छिपकलियों में

लगी सुबकने नकली रानी जैसे रोए कुतिया कानी ।

इति

Buddhinath Mishra

The Poet

बुद्धिनाथ मिश्र

Buddhinath Mishra

Kaikeyi and Manthara

Paired Painting

Kaikeyi and Manthara

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Pandwani carries.