
अधिनायक
Adhinayak
Raghuvir Sahay
1 verse · ~9 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

9 verses · ~1 min
एक था राजा, एक थी रानी मेरी तेरी है पण्डवानी ।
राजा राजजात का भेड़ा रानी थी बेताल पचीसी राजा की दाढ़ी में तिनका रानी ख़तरनाक मकड़ी-सी
ऐसे में मत कर नादानी बाँध के रखियो बोली-बानी ।
राजा था ग़ुलाम रानी का रानी थी उस्ताद तिरंगी नाक रगड़वाती थी सबसे सोचो बस तलवार थी नंगी
परजा बस मूरख अज्ञानी माँगे उससे दाना-पानी ।
किन्तु आग जंगल की फैली जिसमें राख हुआ नौमहला पिघल गया वह भी लपटों में राजा निरा मोम का पुतला
बंसी बजा न पाया नीरो रुतबा गया, गयी परधानी ।
आया एक सिंह गिरिवन से भौंक उठे कुत्ते गलियों में राजा घुसा सियारों के घर रानी शामिल छिपकलियों में
लगी सुबकने नकली रानी जैसे रोए कुतिया कानी ।
इति

Paired Painting
Kaikeyi and Manthara
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Pandwani carries.