
बसंत
Basant
Raghuvir Sahay
4 verses · ~34 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

6 verses · ~1 min
चौरा पर साँझ दीप बारि कें पूजा सँ प्यार बनल चन्द्रमा राति जेकर ठाँढि धेने ठाढि अछि गाछ सिंगरहार बनल चन्द्रमा ।
काँच बाँस बान्हल आकाशदीप बिहुँसल अछि फेर कोनो बात पर मोती सन आखर सँ प्रेमपत्र लिखि गेल अछि के पुरइन-पात पर
नीनक मातल चानन गाछ तर एक समाचार बनल चन्द्रमा ।
अयना मे सतरंगी प्रेमगीत झलकै अछि माछ जेना जाल मे कालिन्दी मे नहाइत राधिका- कृष्णक अभिसार बनल चन्द्रमा ।
कहलो ने मानै मन- मृग जखन बंसी-स्वर पसरै अछि साँझ-भोर एखनो धरि मोन परैए अहाँक गहना छारल देहक पोर-पोर
दूभि-धान पान-फूल सँ भरल सोना कें थार बनल चन्द्रमा।
इति

Paired Painting
Radha and Her Companion
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Chandrama carries.