№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Dushyanta and Shakuntala

Shringara

बसंत

Basant

Raghuvir Sahay
3 min read 4 versesवसंतspringप्रकृति

4 verses · ~3 min

पतझर के बिखरे पत्तों पर चल आया मधुमास, बहुत दूर से आया साजन दौड़ा-दौड़ा थकी हुई छोटी-छोटी साँसों की कम्पित पास चली आती हैं ध्वनियाँ आती उड़कर गन्ध बोझ से थकती हुई सुवास

बन की रानी, हरियाली-सा भोला अन्तर सरसों के फूलों-सी जिसकी खिली जवानी पकी फसल-सा गरुआ गदराया जिसका तन अपने प्रिय को आता देख लजायी जाती। गरम गुलाबी शरमाहट-सा हल्का जाड़ा स्निग्ध गेहुँए गालों पर कानों तक चढ़ती लाली जैसा फैल रहा है। हिलीं सुनहली सुघर बालियाँ! उत्सुकता से सिहरा जाता बदन कि इतने निकट प्राणधन नवल कोंपलों से रस-गीले ओंठ खुले हैं मधु-पराग की अधिकाई से कंठ रुँधा है तड़प रही है वर्ष-वर्ष पर मिलने की अभिलाष।

उजड़ी डालों के अस्थिजाल से छनकर भू पर गिरी धूप लहलही फुनगियों के छत्रों पर ठहर गई अब ऐसा हरा-रुपहला जादू बनकर जैसे नीड़ बसे पंछी को लगनेवाला टोना, मधुरस उफना-उफनाकर आमों के बिरवों में बौराया उमंग-उमंग उत्कट उत्कंठा मन की पिक-स्वर बनकर चहकी अंगड़ाई सुषमा की बाहों ने सारा जग भेंट लिया गउझर फूलों की झुकी बेल मह-मह चम्पा के एक फूल से विपिन हुआ।

यह रंग उमंग उत्साह सृजनमयी प्रकृति-प्रिया का चिकना ताज़ा सफल प्यार फल और फूल का यह जीवन पर गर्व कि जिससे कलि इतरायी जीवन का सुख भार कि जिससे अलि अलसाया। तुहिन-बिन्दु-सजलानुराग यह रंग-विरंग सिन्दुर सुहाग जन-पथ के तीर-तीर छिटके, जन-जन के जीवन में ऐसे मिल जाए जैसे नयी दुल्हन से पहली बार सजन मिलते हैं नव आशाओं का मानव को बासन्ती उपहार मिले प्यार में सदा जीत हो, नहीं कभी हो हार। जिनको प्यार नहीं मिल पाया इन्हें फले मधुमास। पतझर के बिखरे पत्तों पर चल आया मधुमास।

इति

Raghuvir Sahay

The Poet

रघुवीर सहाय

Raghuvir Sahay

Dushyanta and Shakuntala

Paired Painting

Dushyanta and Shakuntala

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Basant carries.