№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

Loading the archive

MM · XXVI

Canvas
Kali

Raudra

चलला गाम बजार

Chalala Gam Bajar

Buddhinath Mishra
2 min read 10 versesमैथिलीMaithiliस्वाभिमान

10 verses · ~2 min

हम ओ कनहा कुकूर नहि जे बाबू साहेबक फेकल माँड़े पर तिरपित भ’ जाइ ।

हमर आदर नहि करू जुनि कहू पण्डित, जुनि कहू बाभन हम सरकारक घूर पर कुण्डली मारिकें बैसल ओ कुकूर छी जकरा महर्षि पाणिनी युवा आ इन्द्रक पाँतिमे सूत्रबद्ध केने छथि ।

हमर परदादा जहिया बाध-बोनमे रहै छलाह तहिया बाघ जकाँ तैनि क’ चलै छलाह।

तहिया गाम छलै दलिद्दरे मुदा छलै सारिल सीसो । तहिया गामक माइ-धीकें दोसरा आँगन जा क’ आगि मँगबामे नहि छलै कोनो अशौकर्य ।

तहिया परिवासँ टोल, टोलसँ गाम गामसँ जनपद, जनपदसँ राष्ट्र आ राष्ट्रसँ विश्व-परिवार बनै छलै ।

बुढ़-बुढ़ानुस कहै छलाह- यत्र विश्वं भतत्येक नीडम्! छाडू पुरना बातकें, बिसरि जाउ ओ परतन्त्र देसक कुदिन-सुदिन बिसरि जाए ओ अराँचीक खोइयामे सैंतल परबल देल जनौ ।

आब अहाँ छी परम स्वतन्त्र वैश्वीकरणक सुनामी अहाँक चौरा पर साटि रहल अछि विश्वग्रामक चुम्बकधर्मी विज्ञापन ।

एकटा जानल-सुनल अदृश्य हाथ चटियासँ भरल किलासमे घुमा रहल छै, ग्लोबकें ।

दुनू पैर धेनें टेबुल पर ग्लोब पर बैसल छै कुण्डली मारि क’ पुरना क्लबक साहेब सभ आ सहेब्बाक आगाँ बैसल छै झुण्डक झुण्ड नँगरकट्टा कुकूर।

बदलि दियौ नवका ‘हिज मास्टर्स वॉयस’क प्रतीक-चिह्न कुकूरकें एकवचनसँ बहुवचन बना दियौ।

इति

Buddhinath Mishra

The Poet

बुद्धिनाथ मिश्र

Buddhinath Mishra

Kali

Paired Painting

Kali

Open the viewer →

If this held you

Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Chalala Gam Bajar carries.