№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Shivaji and Subedar's Daughter

Shanta

स्नेह-शपथ

Sneh-Shapath

Bhawani Prasad Mishra
3 min read 3 versesप्यारloveस्नेह

3 verses · ~3 min

हो दोस्त या कि वह दुश्मन हो, हो परिचित या परिचय विहीन; तुम जिसे समझते रहे बड़ा या जिसे मानते रहे दीन; यदि कभी किसी कारण से उसके यश पर उड़ती दिखे धूल, तो सख़्त बात कह उठने की रे, तेरे हाथों हो न भूल । मत कहो कि वह ऐसा ही था, मत कहो कि इसके सौ गवाह; यदि सचमुच ही वह फिसल गया या पकड़ी उसने ग़लत राह -- तो सख़्त बात से नहीं, स्नेह से काम ज़रा लेकर देखो; अपने अन्तर का नेह अरे, देकर देखो ।

कितने भी गहरे रहें गर्त, हर जगह प्यार जा सकता है; कितना भी भ्रष्ट ज़माना हो, हर समय प्यार भा सकता है; जो गिरे हुए को उठा सके इससे प्यारा कुछ जतन नहीं, दे प्यार उठा पाए न जिसे इतना गहरा कुछ पतन नहीं । देखे से प्यार भरी आँखें दुस्साहस पीले होते हैं हर एक धृष्टता के कपोल आँसू से गीले होते हैं । तो सख़्त बात से नहीं स्नेह से काम ज़रा लेकर देखो, अपने अन्तर का नेह अरे, देकर देखो ।

तुमको शपथों से बड़ा प्यार, तुमको शपथों की आदत है; है शपथ ग़लत, है शपथ कठिन, हर शपथ कि लगभग आफ़त है; ली शपथ किसी ने और किसी के आफ़त पास सरक आई, तुमको शपथों से प्यार मगर तुम पर शपथें छाईं-छाईं । तो तुम पर शपथ चढ़ाता हूँ: तुम इसे उतारो स्नेह-स्नेह, मैं तुम पर इसको मढ़ता हूँ तुम इसे बिखेरो गेह-गेह । हैं शपथ तुम्हारे करुणाकर की है शपथ तुम्हें उस नंगे की जो भीख स्नेह की माँग-माँग मर गया कि उस भिखमंगे की । हे, सख़्त बात से नहीं स्नेह से काम जरा लेकर देखो, अपने अन्तर का नेह अरे, देकर देखो ।

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

Shivaji and Subedar's Daughter

Paired Painting

Shivaji and Subedar's Daughter

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sneh-Shapath carries.