_charity.jpg&w=900&q=72&output=webp&we=&maxage=1y&fit=cover)
स्नेह-पथ
Sneh-Path
Bhawani Prasad Mishra
1 verse · ~31 lines · 2 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
Loading the archive
MM · XXVI

3 verses · ~3 min
हो दोस्त या कि वह दुश्मन हो, हो परिचित या परिचय विहीन; तुम जिसे समझते रहे बड़ा या जिसे मानते रहे दीन; यदि कभी किसी कारण से उसके यश पर उड़ती दिखे धूल, तो सख़्त बात कह उठने की रे, तेरे हाथों हो न भूल । मत कहो कि वह ऐसा ही था, मत कहो कि इसके सौ गवाह; यदि सचमुच ही वह फिसल गया या पकड़ी उसने ग़लत राह -- तो सख़्त बात से नहीं, स्नेह से काम ज़रा लेकर देखो; अपने अन्तर का नेह अरे, देकर देखो ।
कितने भी गहरे रहें गर्त, हर जगह प्यार जा सकता है; कितना भी भ्रष्ट ज़माना हो, हर समय प्यार भा सकता है; जो गिरे हुए को उठा सके इससे प्यारा कुछ जतन नहीं, दे प्यार उठा पाए न जिसे इतना गहरा कुछ पतन नहीं । देखे से प्यार भरी आँखें दुस्साहस पीले होते हैं हर एक धृष्टता के कपोल आँसू से गीले होते हैं । तो सख़्त बात से नहीं स्नेह से काम ज़रा लेकर देखो, अपने अन्तर का नेह अरे, देकर देखो ।
तुमको शपथों से बड़ा प्यार, तुमको शपथों की आदत है; है शपथ ग़लत, है शपथ कठिन, हर शपथ कि लगभग आफ़त है; ली शपथ किसी ने और किसी के आफ़त पास सरक आई, तुमको शपथों से प्यार मगर तुम पर शपथें छाईं-छाईं । तो तुम पर शपथ चढ़ाता हूँ: तुम इसे उतारो स्नेह-स्नेह, मैं तुम पर इसको मढ़ता हूँ तुम इसे बिखेरो गेह-गेह । हैं शपथ तुम्हारे करुणाकर की है शपथ तुम्हें उस नंगे की जो भीख स्नेह की माँग-माँग मर गया कि उस भिखमंगे की । हे, सख़्त बात से नहीं स्नेह से काम जरा लेकर देखो, अपने अन्तर का नेह अरे, देकर देखो ।
इति

Paired Painting
Shivaji and Subedar's Daughter
Open the viewer →
If this held you
Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Sneh-Shapath carries.