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मंगल-वर्षा
Mangal-Varsha
Bhawani Prasad Mishra
2 verses · ~19 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI

4 verses · ~1 min
पी के फूटे आज प्यार के पानी बरसा री हरियाली छा गई, हमारे सावन सरसा री
बादल छाए आसमान में, धरती फूली री भरी सुहागिन, आज माँग में भूली-भूली री बिजली चमकी भाग सरीखी, दादुर बोले री अंध प्रान-सी बही, उड़े पंछी अनमोले री छिन-छिन उठी हिलोर मगन-मन पागल दरसा री
फिसली-सी पगडंडी, खिसकी आँख लजीली री इंद्रधनुष रंग-रंगी आज मैं सहज रंगीली री रुन-झुन बिछिया आज, हिला डुल मेरी बेनी री ऊँचे-ऊँचे पैंग हिंडोला सरग-नसेनी री और सखी, सुन मोर विजन वन दीखे घर-सा री
फुर-फुर उड़ी फुहार अलक दल मोती छाए री खड़ी खेत के बीच किसानिन कजली गाए री झर-झर झरना झरे आज मन-प्रान सिहाये री कौन जनम के पुन्न कि ऐसे औसर आए री रात सखी सुन, गात मुदित मन साजन परसा री
इति

Paired Painting
Krishna and Radha in a Monsoon Landscape
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Paani Varsha Ri carries.