№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Krishna and Radha in a Monsoon Landscape

Shringara

पानी वर्षा री

Paani Varsha Ri

Bhawani Prasad Mishra
1 min read 4 versesवर्षाrainसावन

4 verses · ~1 min

पी के फूटे आज प्यार के पानी बरसा री हरियाली छा गई, हमारे सावन सरसा री

बादल छाए आसमान में, धरती फूली री भरी सुहागिन, आज माँग में भूली-भूली री बिजली चमकी भाग सरीखी, दादुर बोले री अंध प्रान-सी बही, उड़े पंछी अनमोले री छिन-छिन उठी हिलोर मगन-मन पागल दरसा री

फिसली-सी पगडंडी, खिसकी आँख लजीली री इंद्रधनुष रंग-रंगी आज मैं सहज रंगीली री रुन-झुन बिछिया आज, हिला डुल मेरी बेनी री ऊँचे-ऊँचे पैंग हिंडोला सरग-नसेनी री और सखी, सुन मोर विजन वन दीखे घर-सा री

फुर-फुर उड़ी फुहार अलक दल मोती छाए री खड़ी खेत के बीच किसानिन कजली गाए री झर-झर झरना झरे आज मन-प्रान सिहाये री कौन जनम के पुन्न कि ऐसे औसर आए री रात सखी सुन, गात मुदित मन साजन परसा री

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

Krishna and Radha in a Monsoon Landscape

Paired Painting

Krishna and Radha in a Monsoon Landscape

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Paani Varsha Ri carries.