
पानी वर्षा री
Paani Varsha Ri
Bhawani Prasad Mishra
4 verses · ~16 lines · 1 min
№ MMXXVI
RACHNA · A LIVING ARCHIVE
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MM · XXVI
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2 verses · ~2 min
पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री| हरियाली छा गयी, हमारे सावन सरसा री| बादल आये आसमान मे,धरती फूली री, अरी सुहागिन, भरी मांग में भूली -भूली री, बिजली चमकी भाग सखी री, दादुर बोले री, अंध प्राण सी बहे, उड़े पंछी अनमोले री, छन-छन उडी हिलोर, मगन मन पागल दरसा री | पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री |
फिसली-सी पगडण्डी,खिसली आँख लजीली री, इन्द्र-धनुष रंग रंगी, आज मै सहज रंगीली री, रुनझुन बिछिया आज, हिला-डुल मेरी बेनी री, ऊँचे-ऊँचे पेंग, हिंडोला सरग -नसेनी री, और सखी सुन मोर! बिजन वन दीखे घर-सा री| पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री| फुर-फुर उड़ी फुहार अलक दल मोती छाये री, खड़ी खेत के बीच किसानिन कजरी गाये री, झर-झर झरना झरे ,आज मन प्राण सिहाये री, कौन जन्म के पुण्य कि ऐसे शुभ दिन आये री, रात सुहागिन गात मुदित मन साजन परसा री| पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री|
इति
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Paired Painting
Scene from a Hindu Marriage
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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mangal-Varsha carries.