№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

Canvas
Scene from a Hindu Marriage

Shringara

मंगल-वर्षा

Mangal-Varsha

Bhawani Prasad Mishra
2 min read 2 versesसावनmonsoonबारिश

2 verses · ~2 min

पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री| हरियाली छा गयी, हमारे सावन सरसा री| बादल आये आसमान मे,धरती फूली री, अरी सुहागिन, भरी मांग में भूली -भूली री, बिजली चमकी भाग सखी री, दादुर बोले री, अंध प्राण सी बहे, उड़े पंछी अनमोले री, छन-छन उडी हिलोर, मगन मन पागल दरसा री | पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री |

फिसली-सी पगडण्डी,खिसली आँख लजीली री, इन्द्र-धनुष रंग रंगी, आज मै सहज रंगीली री, रुनझुन बिछिया आज, हिला-डुल मेरी बेनी री, ऊँचे-ऊँचे पेंग, हिंडोला सरग -नसेनी री, और सखी सुन मोर! बिजन वन दीखे घर-सा री| पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री| फुर-फुर उड़ी फुहार अलक दल मोती छाये री, खड़ी खेत के बीच किसानिन कजरी गाये री, झर-झर झरना झरे ,आज मन प्राण सिहाये री, कौन जन्म के पुण्य कि ऐसे शुभ दिन आये री, रात सुहागिन गात मुदित मन साजन परसा री| पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री|

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

Scene from a Hindu Marriage

Paired Painting

Scene from a Hindu Marriage

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Mangal-Varsha carries.