№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Bhayanaka

जंगल के राजा !

Jungle Ke Raja

Bhawani Prasad Mishra
2 min read 1 versesजंगलforestशेर

1 verses · ~2 min

जंगल के राजा, सावधान! ओ मेरे राजा, सावधान! कुछ अशुभ शकुन हो रहे आज l जो दूर शब्द सुन पड़ता है, वह मेरे जी में गड़ता है, रे इस हलचल पर पड़े गाज l ये यात्री या कि किसान नहीं, उनकी-सी इनकी बान नहीं, चुपके चुपके यह बोल रहे । यात्री होते तो गाते तो, आगी थोड़ी सुलगाते तो, ये तो कुछ विष-सा बोल रहे । वे एक एक कर बढ़ते हैं, लो सब झाड़ों पर चढ़ते हैं, राजा! झाड़ों पर है मचान । जंगलके राजा, सावधान! ओ मेरे राजा, सावधान! राजा गुस्से में मत आना, तुम उन लोगों तक मत जाना; वे सब-के-सब हत्यारे हैं । वे दूर बैठकर मारेंगे, तुमसे कैसे वे हारेंगे, माना, नख तेज़ तुम्हारे हैं । "ये मुझको खाते नहीं कभी, फिर क्यों मारेंगे मुझे अभी?" तुम सोच नहीं सकते राजा । तुम बहुत वीर हो, भोले हो, तुम इसीलिए यह बोले हो, तुम कहीं सोच सकते राजा । ये भूखे नहीं पियासे हैं, वैसे ये अच्छे खासे हैं, है 'वाह वाह' की प्यास इन्हें । ये शूर कहे जायँगे तब, और कुछ के मन भाएँगे तब, है चमड़े की अभिलाष इन्हें, ये जग के, सर्व-श्रेष्ठ प्राणी, इनके दिमाग़, इनके वाणी, फिर अनाचार यह मनमाना! राजा, गुस्से में मत आना, तुम उन लोगों तक मत जाना ।

इति

Bhawani Prasad Mishra

The Poet

भवानीप्रसाद मिश्र

Bhawani Prasad Mishra

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Four more, in the same key.

Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Jungle Ke Raja carries.