№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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Portrait of a Lady

Karuna

परदे में क़ैद औरत की गुहार

Parde Mein Qaid Aurat Ki Guhar

Bharatendu Harishchandra
2 min read 1 versesस्त्री-विमर्शwomen's rightsपर्दा प्रथा

1 verses · ~2 min

(भारतेन्दु जी द्वारा लिखित यह गीत उनकी प्रगतिशील दृष्टि का अनुपम उदाहरण है। लोकशैली में गाया जाकर यह आज भी अपनी लोकप्रियता सिद्ध कर सकता है।) लिखाय नाहीं देत्यो पढ़ाय नाहीं देत्यो। सैयाँ फिरंगिन बनाय नाहीं देत्यो॥ लहँगा दुपट्टा नीको न लागै। मेमन का गाउन मँगाय नाहीं देत्यो। वै गोरिन हम रंग सँवलिया। नदिया प बँगला छवाय नाहीं देत्यो॥ सरसों का उबटन हम ना लगइबे। साबुन से देहियाँ मलाय नाहीं देत्यो॥ डोली मियाना प कब लग डोलौं। घोड़वा प काठी कसाय नाहीं देत्यो॥ कब लग बैठीं काढ़े घुँघटवा। मेला तमासा जाये नाहीं देत्यो॥ लीक पुरानी कब लग पीटों। नई रीत-रसम चलाय नाहीं देत्यो॥ गोबर से ना लीपब-पोतब। चूना से भितिया पोताय नाहीं देत्यों। खुसलिया छदमी ननकू हन काँ। विलायत काँ काहे पठाय नाहीं देत्यो॥ धन दौलत के कारन बलमा। समुंदर में बजरा छोड़ाय नाहीं देत्यो॥ बहुत दिनाँ लग खटिया तोड़िन। हिंदुन काँ काहे जगाय नाहीं देत्यो॥ दरस बिना जिय तरसत हमरा। कैसर का काहे देखाय नाहीं देत्यो॥ ‘हिज्रप्रिया’ तोरे पैयाँ परत है। ‘पंचा’ में एहका छपाय नाहीं देत्यो॥ (भारतेन्दु जी की रचना ‘मुशायरा’ से)

इति

Bharatendu Harishchandra

The Poet

भारतेंदु हरिश्चंद्र

Bharatendu Harishchandra

Portrait of a Lady

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Portrait of a Lady

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Parde Mein Qaid Aurat Ki Guhar carries.