№ MMXXVI

RACHNA · A LIVING ARCHIVE

Rachna by M.

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MM · XXVI

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The Court Dancer

Hasya

गाती हूँ मैं

Gati Hoon Main

Bharatendu Harishchandra
1 min read 8 versesग़ज़लghazalहास्य

8 verses · ~1 min

हज़ल (हास्य ग़ज़ल)

गाती हूँ मैं औ नाच सदा काम है मेरा ए लोगो शुतुरमुर्ग परी नाम है मेरा

फन्दे से मेरे कोई निकलने नहीं पाता इस गुलशने आलम में बिछा दाम है मेरा

दो-चार टके ही पै कभी रात गंवा दूं कारुं का खजाना तभी इनआम है मेरा

पहले जो मिले कोई तो जी उसका लुभाना बस कार यही तो सहरो शाम है मेरा

शुरफा व रूज़ला एक हैं दरबार में मेरे कुछ खास नहीं फ़ैज तो इक आम है मेरा

बन जाएँ चुगद तब तो उन्हें मूड़ ही लेना खाली हों तो कर देना धता काम है मेरा

ज़र मज़हबो मिल्लत मेरा बन्दी हूँ मैं ज़र की ज़र ही मेरा अल्लाह है ज़र राम है मेरा

इति

Bharatendu Harishchandra

The Poet

भारतेंदु हरिश्चंद्र

Bharatendu Harishchandra

The Court Dancer

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The Court Dancer

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Chosen for their rasa and their register, not their popularity. Each one carries some part of what Gati Hoon Main carries.